Monday, June 26, 2017

यादें और सिर्फ यादें










तेरी  यादें  सताती  है  उन  रूहो  की  तरह ... 

जिनके  ख्वाहिशे  अधूरे  सी  रह  जाती  है ...

अगर   मिले  मौका .. तो   पा  लू  तुझे ..

दुनिया  के  ज़ंजीरें  तोड़  कर ..

अपनी  हर  सास  के  समां  लू  तुझे |



तुझे  तो  न  आएगी  मेरी  याद  ज़ालिम  सनम , 

हम  ही  प्यार  का  घुट  पी  कर  रह  गए  हर  रात ...

तू  खुश  रहे  अपने  दुनिया  में ,  दुआ  है  निकली  बस  आज ..

हर  लम्हा .. हर  सरसराहट .. हर  छुअन  पे
.. 
अक्ष  हो  तेरा  सिर्फ  तेरा  मेरे  पास |





हिम्मत  तो  मुझमें भी न थी ..

की  बना  लू  सदा  के  लिए  तुझे  मे  अपना .. 

मिले  एक  मौका ,  या  कोई  इबादत  से  तू  मझे .. 

समेट लू  आँचल  मे  ज़िन्दगी  के  लिए|




1 comment:

  1. कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
    मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
    ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

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